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विराट यानी डोनाल्ड ट्रंप



कुलविंदर सिंह कंग

दोनों ही तेज़तर्रार हैं.. इसलिए ही तो सारी दुनियां के लिए इन्हें झेलना मुश्किल हो रहा है। मैदान पर तो विराट और उसका बल्ला बोलता ही था.. लेकिन अब जब धर्मशाला में खेला ही नहीं.. फिर भी भारत ने ऑस्ट्रेलिया को चारों खाने चित्त करके सीरीज पर ही अधिकार कर लिया तो यही कहा जा सकता है कि ये विराट कोहली नहीं है बल्कि विराट ट्रंप है.. और धर्मशाला में तो विराट के ट्रंप कार्ड ही चल निकले। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दिन से ही और विराट ट्रंप ने पहली गेंद से ही सबको ऐसा ठोकना शुरू किया कि अब उन्हें छिपने को जगह ही नहीं मिल रही है। 



यहां ऑस्ट्रेलिया वाले एक गल्ती कर गए। विराट की तुलना डोनाल्ड ट्रंप से कर दी.. यही अगर उसकी तुलना अखिलेश, राहुल, मायावती, हरीश रावत, प्रकाश सिंह बादल अथवा केजरीवाल से की होती तो शायद उसके प्रदर्शन में गिरावट आ जाती और हो सकता है कि इन प्रात: स्मरणीय नेताओं में भी कुछ जान आ जाती। यहां हो सकता था कि विराट कोहली कुछ आपत्ति करता। आगे आई.सी.सी. चैंपियंस ट्रॉफी जून में होनी है। मेरी राय है कि वहां जाने से पहले विराट की तुलना योगी आदित्यनाथ से कर देनी चाहिए.. फिर देखना कैसे सारी अवैध गेंदें सीमा पार हो जाएंगी। आई.सी.सी. का खर्चा बढ़ जएगा क्योंकि हर छक्के के बाद नई गेंद लानी पड़ेगी, पुरानी गेंद तो यूं गायब हो जायेंगी जैसे उत्तर प्रदेश से सपा और बसपा तथा पंजाब में अकाली गायब हुए हैं। फिर तो मैदान पर कैप्टन ही दिखाई देगा।

अब ऑस्ट्रेलिया वाले भी बैठे माथा पकड़ कर रो रहे होंगे.. कि हाय, हमने विराट को ट्रंप क्यों कह डाला? ट्रंप तो फिर भी बराक ओबामा को हेलीकॉप्टर तक छोड़ने गए थे लेकिन विराट ने तो ऑस्ट्रेलियाइयों को कहीं का भी नहीं छोड़ा है। ट्रंप ने भी विराट की तरह बहुत इश्क-विश्क किया है.. देगी मिर्च का तड़का.. दोनों का अंगअंग फड़का। नहीं जनाब.. आप गल्त समझ रहे हैं.. विराट को क्रिकेट से प्यार हो गया है। जहां ट्रंप अमेरिकन्स को नंबर वन बनाने पर तुला है वहीं विराट भी भारतीय क्रिकेट को सातवें आसमान पर ले जाकर छोड़ेगा। अब ऑस्ट्रेलिया वाले ढूंढ़ रहे होंगे कि बाकी छह आसमान कहां हैं?

ट्रंप की पहचान उसकी लाल रंग की टाई से है लकिन वो ही लाल रंग की टाई विराट के गले में लटका कर देखो.. कुछ समय बाद ही वो क्रिकेट बैट बन जाएगी। अब तो सारी विश्व क्रिकेट बिरादरी मिलकर ट्रंप से ही रिक्वेस्ट कर सकती है कि जनाब आप ही विराट पर कोई बैन-शैन लगाओ। अब हमारे तो बस की बात नहीं है। हमने तो मजाक में ही ट्रंप से तुलना कर दी थी.. अब हमें क्या पता था कि विराट इसे इतना सीरियसली ले लेगा।

इस समय की भारतीय टीम इतनी फिट और सैट है कि भविष्य में हो सकता है सीरीज दर सीरीज चयनकर्ता टीम को न चुने बल्कि टीम चयनकर्ताओँ का चुनाव कर सकती है। उधर अमेरिका के सुप्रीम ने ओबामा केयर को बंद करने की कोशिश की, इधर भारतीय सुप्रीम ने क्रिकेट के बुढ़ऊ ओबामाओं की केयर बंद कर दी है।

विराट को अगर रोकना ही था तो उसकी तुलना केंद्रीय कर्मचारियों को मिलनेवाले दो परसेंट डी.ए. से करनी थी, तो हो सकता था कि उसका बैटिंग करने का जोश और रणनीति बनाने की योजना ठुस्स हो जाती। खेल के सभी विशेषज्ञों को ये आगाह किया जाता है कि भविष्य में किसी की तुलना देखभाल कर किया करें। किसी का भट्ठा बिठाना हो तो राहुल बाबा से तुलना काफी है। किसी शादीशुदा प्रताड़ित पति को जोश देना हो तो मोदी-योगी से तुलना कर दो। अब ट्रंप से तुलना कर दो तो रिएक्शन होना ही था। हालांकि मैं कोई ट्रंप की तरह आशिक मिजाज प्रवृति का नहीं हूं लेकिन कभी लाल पगड़ी के साथ लाल टाई लगा कर घर से निकलूं तो मेरी बीवी भी शंकावश पूछ लेती है कि ये लाल टाई किसके लिए लगाई है? बोलो ट्रंप महाराज की जय। लाल टाई की जय।   

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